गोल्जीकाय
*कैमीलोगोल्जी ने उल्लू की तंत्रिका कोशिका में गोल्जी उपकरण की खोज की थी।
गोल्जीकाय केंद्रक के पास पाए जाने वाली सगन रंजीत संरचना है।
* पादपों में गाल्जीकाय कम विकसित होती है जिसे डिक्टीयोसोम कहते हैं।
*गोल्जीकाय का निर्माण बहुत सारी चपटी प्लेट के समान थेली व कुंड से होता है।
* इनका व्यास 0.5 माइक्रोमीटर से 1 माइक्रोमीटर होता है।
यह थैलियां एक दूसरे के समांतर स्थिर होती है गोल्जीकाई बहुरूपी अंग है।
जिसमें ध्रुवियता पाई जाती है केंद्रक के पास स्थित सतह को सिस कहते हैं।
*इसमें कुंड पाए जाते हैं और यह निर्माण कार्य सतह होती है।
* केंद्रक से दूर स्थित विपरीत सतह को ट्रांस कहते हैं यह परिपक्व होती है।
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