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हिड्रोपोनिक्स या मृदा विहीन कृषी

 हिड्रोपोनिक्स  या मृदा विहीन  कृषी 






हिड्रोपोनिक्स  या मृदा विहीन  कृषी:-


   इसमे पौधे को बिना मिट्टी के उगाया जाता हैं इस तकनीक की खोज सर्व प्रथम  w . R. Gerck ne सन् 1930 में की थी l              

  1. इस विधी द्वारा कम समय मे अधिक पौधे तैयार किये जाते है।                                                     

    2.  इस विधी द्वारा किसी भी मौसम मे फल, फूल व सब्जी प्राप्त की जा सकती हैं।                              

   3.   इस विधि द्वारा बहुमाजिला इमारतों पर कृषि की जा  सकती हैं।       


क्या है ये तकनीक :-


हाइड्रोपोनिक्सपद्धति में मृदा के बिना ही पादपों को कम्प्युटराइज्ड सिस्टम द्वारा उसकी जरूरत के अनुसार बून्द-बून्द पोषक तत्व प्रदान किए जाते है। ग्रीन सेड में जमीन से 2-4 फिट की ऊंचाई पर स्टेण्ड लगाकर नारियल के खोल और ऊन के गुच्छों में पौधे रोपित किए जाते हैं। पोषक खनिज लवणों का विलयन पाइपों के जरीय कोकोपिट्स के माध्यम से पौधों तक पहुंचाया जाता है।इसमें कोकोपिट मिट्टी के समान पोषण और वात्सल्य दे कर पौधे का संवर्धन करता है।नारियल के खोल ऊन के गुच्छों में स्पंज के समान आद्रता और नमी सोखने की अद्भुत क्षमता होती है।एक किलोग्राम कोकोपिट 15 लीटर तक पानी संग्रहित कर सकता है। मृदा रहित होने से इसे सोइल लेस कल्चर भी कहा जाता है।।सुनने में भले ही अजीब लगे इस विधा में मनुष्यों के समान ही एक्स रे,सिटी स्केन अन्य गजेटस के जरिए पौधे के स्वास्थ्य की भी जांच की जाती है। रोग कमी का पता लगाकर तदानुसार रोगग्रस्त पौधे का उपचार करके उसे संक्रमण रहित किया जाता है।पौधे की स्क्रेनिंग अत्याधुनिक ग्रीन हाउस में की जाती है।


 विधि:-                                    

                        सर्व प्रथम एक बड़े जार मे पौधे  की वृद्धि के लिए जरूरी तत्वों की मात्रा को निश्चित अनुपात मे लेकर घोल बना लेते है अब पौधे को जार मे स्थिर कर देते है। एक वायु नलिका लगा देते है क्योकि विलयन मे ओक्सिजन की कमी होती हैं ओक्सिजन देने के लिए बार- बार नलिका का उपयोग होता है। 

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