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क्या आप जानते हैं? (भाग-2)

 





1. सबसे छोटा तारामंडल कौनसा है?

Ans: सबसे छोटा तारामंडल द सदर्न क्रॉस (Southern cross, दक्षिणी काँटा) तारा मंडल है। 

यह भारत में सर्दियों और बसंत के मौसम में गुजरात से दक्षिणी क्षेत्रों में देखा जा सकता है, लेकिन उत्तर भारत से नहीं। पृथ्वी के दक्षिणी गोलार्ध (हेमिसफ़ेयर) से यह किसी भी मौसम में देखा जा सकता है।

पुराने समय में नाविक आकाश में इसके त्रिशंकु निशान को देख कर अपने स्थान को समझ ले लेते थे।

त्रिशंकु तारामंडल में पाँच मुख्य तारे हैं, हालांकि वैसे इसमें 19 तारों को बायर नाम दिए जा चुके हैं। इनमें से एक के इर्द-गिर्द ग़ैर-सौरीय ग्रह परिक्रमा करते हुए पाए गए हैं। इस तारामंडल के मुख्य पाँच तारे इस प्रकार हैं -

alpha; Cru - एक्रक्स

beta; Cru - त्रिशंकु शिर

gamma; Cru - गामा क्रूसिस

delta; Cru - डॅल्टा क्रूसिस

epsilon; Cru - ऍप्सिलॉन क्रूसिस

 


2. उल्काएं क्या है?

Ans: कई बार रात के समय आकाश कि ओर देखने पर लगता है कि कोई तारा टूटकर एक चमकीली रेखा बनाता हुआ वायुमंडल में गायब हो गया l इसे आम भासा में तारा टूटना कहते हैं l टूटकर गिरने वाले ये आकाशीय पिण्ड वास्तव में तारे नहीं होते, बल्कि उल्काएं (Meteorites) होती हैं l

उल्काएं वास्तव में छोटे-बड़े आकाशीय पिण्ड हैं l जो सौरमंडल (Solar System) के सदस्य हैं और सूर्य कि परिक्रमा करते हैं l जब कभी कोई पिण्ड घूमते-घूमते पृथ्वी के पास आ जाता है, तो पृथ्वी कि आकर्षण शक्ति के कारण यह पिण्ड पृथ्वी कि और खिच जाता है, खिंचाव से पिण्ड का वेग बहुत अधिक बढ़ जाता है और वायुमंडल के घिषॅण के कारण यह इतना गर्म हो जाता है कि इसमें से गैसें निकलने लगती हैं l ये गैसें जल उठती है और वायुमंडल प्रकाशित हो उठता है l हवा में रगड़ की आवाज़ दूर-दूर तक सुनाई देती है l गर्मी और घिषॅण के कारण इनके बहुत छोटे-छोटे टुकड़े हो जाते हैl जो वायुमंडल में ही बिखर जाते हैं लेकिन कुछ पिण्ड इतने बड़े होते हैं कि वे पूरी तरह वायुमंडल में नस्ट नहीं हो पाते, इसलिए उनके कुछ हिस्से पृथ्वी पर गिर जाते हैं l 

हमें उल्काएं वायुमंडल में 112 कि. मी. दुरी पर दिखाई देने लगती हैं l

अधिकांश उल्काएं वायुमंडल से पृथ्वी पर 80 कि. मी. दूर कि ऊंचाई तक आते-आते नष्ट हो जाती हैं l इसका वेग प्राय: 160 कि. मी. से लेकर 200 कि. मी. प्रति सैकिण्ड तक होता है l 

उल्कापात दिन और रात दोनों में ही होता रहता है, लेकिन दिन के प्रकाश में यह हमें दिखाई नहीं देता l  


उल्काएं तीन प्रकार कि होती हैं l 

🌠 पहली तरह कि उल्का को टूटता तारा (Shooting Star) कहते हैं यह कम प्रकाशयुक्त तारे की तरह जान पड़ती है l 

🌠 दूसरी तरह कि उल्का, उल्का प्रस्तर (Meteorites) कहलाती है l यह इतनी बड़ी होती है कि इसका कुछ अंश पृथ्वी तक पहुंच जाता है l 

🌠 तीसरी तरह कि उल्का अग्निपिण्ड (Fireballs) कहलाती है l ये बड़ी होने पर भी आकाश में ही चूर-चूर हो जाती हैं l



3. सौर परिवार या सौर मंडल क्या है?

Ans: सौर मंडल में सूर्य और वह खगोलीय पिंड सम्मलित हैं, जो इस मंडल में एक दूसरे से गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा बंधे हैं। किसी तारे के इर्द गिर्द परिक्रमा करते हुई उन खगोलीय वस्तुओं के समूह को ग्रहीय मण्डल कहा जाता है जो अन्य तारे न हों, जैसे की ग्रह, बौने ग्रह, प्राकृतिक उपग्रह, क्षुद्रग्रह, उल्का, धूमकेतु और खगोलीय धूल। हमारे सूरज और उसके ग्रहीय मण्डल को मिलाकर हमारा सौर मण्डल बनता है।इन पिंडों में आठ ग्रह, उनके 166 ज्ञात उपग्रह, पाँच बौने ग्रह और अरबों छोटे पिंड शामिल हैं। इन छोटे पिंडों में क्षुद्रग्रह, बर्फ़ीला काइपर घेरा के पिंड, धूमकेतु, उल्कायें और ग्रहों के बीच की धूल शामिल हैं।



4. ठोस पदार्थ गर्मी पाकर द्रव पदार्थ में क्यों परिवर्तित होता है?

Ans: जब ठोस पदार्थ को गर्म किया जाता है तो -

1. उसमे निहित परमाणु या अणु ऊर्जा प्राप्त करते है।

2. उसमे निहित परमाणु या अणु उग्रता से चलने लगते है। इसके परिणाम स्वरूप परमाणु या अणु के बीच की दूरी  बढ़ने लगती है या बंध शक्ति कम हो जाती है। 

3. परमाणु या अणु अलग-अलग या दूर हो जाते है। इन सब क्रियाओं के कारण कोई ठोस या घन पदार्थ द्रव में परिवर्तित हो जाता है।



5. समुद्र का नाग क्या है?

Ans: यह भी एक तारा मंडल है, इसे हाइड्रा तारामंडल के नाम से भी जाना जाता है। 

यह उत्तरी गोलार्द्ध के आकाश से दक्षिणी गोलार्द्ध के आकाश में ज्यादा साफ़-साफ़ दिखाई देता है। 

यह आकाश के करीब एक चौथाई भाग को घेर लेता है। 

यह जेमिनी या मिथुन से लेकर वरगो या कन्या के दक्षिणी ओर तक फैला हुआ है। 

इसका आकार लम्बा और घुमावदार है।


6. रत्नों के क्या उपयोग है?

Ans: रत्न (Gemstone) आकर्षक खनिज का एक टुकड़ा होता है जो कटाई और पॉलिश करने के बाद गहने और अन्य अलंकरण बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है। 

बहुत से रत्न ठोस खनिज के होते हैं, लेकिन कुछ नरम खनिज के भी होते हैं। 

रत्न क़ीमती पत्थर को कहा जाता है। अपनी सुंदरता की वजह से यह क़ीमती होते हैं। रत्न अपनी चमक और अन्य भौतिक गुणों के सौंदर्य की वजह से गहने में उपयोग किया जाता है। 

ग्रेडिंग, काटने और पॉलिश से रत्नों को एक नया रूप और रंग दिया जाता है और इसी रूप और रंग की वजह से यह रत्न गहनों को और भी आकर्षक बनाते हैं। 

रत्न का रंग ही उसकी सबसे स्पष्ट और आकर्षक विशेषता है। रत्नों को गर्म कर के उसके रंग की स्पष्टता बढ़ाई जाती है।


माणिक्य और नीलम को उद्योगों में घर्षण यंत्रो में ,हीरे को कतरन उपकरणों में, नीलम को घड़ी बनाने में, बड़े माणिक्य स्फटिक को लेजर में इस्तेमाल करते है|


प्रत्येक रत्न में रंगों का फिंगर प्रिन्ट होता है। इसे शोषक स्पेक्ट्रम कहते हैं। यह फिंगर प्रिन्ट प्रत्येक रत्न में भिन्न-भिन्न होता है जो रत्न की पहचान स्थापित करता है। इसे आँखों से यूँ ही नहीं देखा जा सकता। इसलिए रत्नशास्त्री इसे स्पेक्ट्रोस्कोप यंत्र से देखते हैं। यह यंत्र रत्न से निकलने वाली रोशनी को इसके रंगों के स्पेक्ट्रम में विभाजित कर देता है। यह प्रत्येक रत्न में अलग-अलग होता है। इसलिए रत्न की पहचान आसानी से होती है।



7. बुध ग्रह की विशेषताएं बताईये?

Ans: यह सूर्य के सबसे निकट स्थित ग्रह है,इसका रात्रि में आकाश में पता लगाना मुश्किल है|

यह 2,439.7 किमी की विषुववृत्तिय त्रिज्या वाला सौरमंडल का सबसे छोटा ग्रह है।  इसका द्रव्यमान 0.055 (पृथ्वी=1) है|

इसकी बाहरी परत पर ज्वालामुखी के निशाँ पड़े है|

इस ग्रह में लोहे का एक विशाल क्रोड़ है|

यह अपनी अक्ष पर बहुत धीरे-धीरे परिक्रमा करता है| लेकिन सूर्य की चारों ओर बहुत तेजी से परिक्रमा करता है|

बुध की सतह पर गढ्ढे काफी गहरे है, कुछ सैकड़ो किमी लम्बे और तीन किमी तक गहरे है।

बुध का भूपटल सभी ग्रहों की तुलना में तापमान का सर्वाधिक उतार-चढाव महसूस करता है, जो कि 100 K  रात्रि से लेकर भूमध्य रेखीय क्षेत्रों में दिन के समय 700 K तक है।



8. सूर्य कलंक क्या है?

Ans: सूर्य कलंक विभिन्न आकारों और नमूनों के धब्बे होते है। जिन्हें सूर्य के प्रकाश वलय पर देखा जा सकता है। गेलिलियो ही प्रथम व्यक्ति थे जिन्होंने 16वी शताब्दी में अपनी दूरबीन द्वारा इन सूर्य कलंको को देखा,इन सूर्य कलंको के दो विशिष्ट भाग होते है प्रच्छाया और उपच्छाया ।



9. सूर्य की परते कौन-कौन सी है?

Ans: सूर्य की चार परते होती है:  एक क्रोड़ जिसे सूर्य का इंजन कक्ष कहा जाता है। सूर्य की पूरी ऊर्जा यही उत्पन्न होती है। यह सूर्य के अन्तभाग की गहराई में है|इस क्रोड़ में उत्सर्जित ऊर्जा बाहरी परतो में पहुचती है,क्रोड़ का तापमान 15,000,000 डिग्री सेल्सियस होता है।  दूसरी पर्त्प्रकाश वलय होती है जो हमको दिखाई देती है| इसकी बाहरी परत का ताप 6000 डिग्री सेल्सियस होता है। यह एक पतली परत है इसकी मोटाई 544 कि.मी. है। इसकी बाहरी पर्त् पर काले धब्बे होते है जिन्हें सूर्य-कलंक कहते है। तीसरी वर्ण वलय तथा चौथी प्रभा वलय।



10. घर्षण क्या है?

Ans: घर्षण वह बल या शक्ति है जो एक दूसरे पर सरकते हुए पदार्थो की गति का विरिध करता है। अर्थात वह बल जो चलते पदार्थो की गति को कम कर देता है।

घर्षण तीन प्रकार के होते हैं:-

1. स्थैतिक घर्षण: जब  एक पिण्ड को दूसरे पिण्ड पर चलाने का प्रयास किया जाता है फिर भी पहला पिण्ड विरामावस्था में ही रहता है तो दोनों पिण्डों के संपर्क तलों के मध्य कार्य करने वाले घर्षण को स्थैतिक घर्षण कहते हैं।

2. सीमान्त घर्षण: जब  एक पिण्ड को दूसरे पिण्ड पर चलाने का प्रयास किया जाता है और पहला पिण्ड ठीक चलने को तैयार होता है तो इस स्थिति

को सीमान्त संतुलन की स्थिति कहते हैं। सीमान्त संतुलन की स्थिति में कार्य करने वाले घर्षण को सीमान्त घर्षण कहते हैं।

3. गतिक घर्षण : जब एक पिण्ड दूसरे पिण्ड के ऊपर चलता है तो दोनों पिण्डों के सम्पर्क तलों के मध्य कार्य करने वाले घर्षण को गतिक घर्षण कहते हैं।


हमारे दैनिक जीवन में घर्षण का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। पृथ्वी की सतह पर चलनेवाले प्रत्येक वाहन की गति सतह तथा वाहन के आधार के बीच घर्षणबल द्वारा ही संभव है। अत: घर्षण गति बाधक तथा साधक दोनों ही है। धारुक और स्नेहकों के व्यवहार में भी घर्षण का प्रमुख स्थान है।


11. गतियों के प्रकार बताईये?

Ans: यदि कोई वस्तु अन्य वस्तुओं की तुलना में समय के सापेक्ष में स्थान परिवर्तन करती है, तो वस्तु की इस अवस्था को गति (motion/मोशन) कहा जाता है।

सामान्य शब्दों में गति का अर्थ - वस्तु की स्थिति में परिवर्तन गति कहलाती है।


कुछ गतियाँ निम्न प्रकार की होती है- 

1. स्थानांतरित गति- फर्श पर एक डिब्बे का सरकना, खिड़की का खुलना व बंद होना, दराज का खुलना व बंद होना, कागज पर लिखना,बाण चलाना।

2. घूर्णक गति- पंखे का चलना,पृथ्वी का अपने अक्ष पर घूमना।   

3. दोलनी गति- लोलक का चलना।

4. घूर्णक स्थानांतरित गति- गेंद का लुढकना, ड्रिलिंग मशीन।



12. मंगल पर क्या जीवन सम्भव है?

Ans: मंगल ग्रह, हमारी धरती का सबसे क़रीबी पड़ोसी है।

मंगल पर दिन की अवधि लगभग पृथ्वी पर दिन की अवधि के समान है।

इस पर वर्ष और उसकी ऋतुओ की अवधि हमारे वर्ष और ऋतुओ की अवधि से दुगनी है। यह वसंत ऋतु में हरित रंग का होता है और शरद ऋतु में भूरे रंग का होता है। परंतु इसका वातावरण पतला होता है और ऐसा लगता है कि यहाँ बहुत कम आक्सीजन व जल वाष्प है। फिर भी विज्ञानियों का ऐसा विश्वास है कि जीवन यही सम्भव हो सकता है।


13. मिट्टी की रचना किस प्रकार हुई?

Ans: पृथ्वी ऊपरी सतह पर मोटे, मध्यम और बारीक कार्बनिक तथा अकार्बनिक मिश्रित कणों को मृदा (मिट्टी / soil) कहते हैं। 

जब पृथ्वी का निर्माण हुआ था तब मिट्टी नही थी, उस समय केवल शिलाएं थी।  ये शिलाएं ताप ,बारिश, हवा के बल के सामने खुली पड़ी थी।  धीरे-धीरे इन शिलाओं में दरारे पद गई और वे छोटे छोटे टुकडो में टूट गई। 

जब पृथ्वी पर पौधो का आगमन वे इन शिला युक्दो की छोटी छोटी दरारों में उगने लगे। धीरे-धीरे ये शिला टुकडो में महीन हो गये और छोटे छोटे मृत पौधे इन महीन शिला टुकडो के सस्थ घुल गये। इसके परिणामस्वरूप मिट्टी का निर्माण हुआ। 

 मृदा विज्ञान(Pedology) भौतिक भूगोल की एक प्रमुख शाखा है जिसमें मृदा के निर्माण, उसकी विशेषताओं एवं धरातल पर उसके वितरण का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता हैं।



14. परछाई कैसे बनती है?

Ans: किसी भी पदार्थ की परछाई प्रकाश के स्रोत के विरुद्ध दिशा में बनती है। यह स्थिर नही होती है। यह प्रकाश के स्रोत या पदार्थ के साथ चलती है। परछाई की लम्बाई हमेशा समान नही होती है। जब प्रकाश के स्रोत पदार्थ और आधार के बीच का कोण बदलता है तो यह परछाई बदलती है। ये परछाइयाँ किसी भी पदार्थ की लम्बाई का परिकलन करने के लिए उपयोगी होती है। 



15. घर्षण को कैसे कम किया जा सकता है?

Ans: घर्षण बल वह विरोधी बल है,जो सतहों के बीच होने वाली आपेक्षिक गति का विरोध करता है। घर्षण(friction) का मुख्य कारण वस्तू की सतह का खुरदुरा होना होता है।


सतहों के बीच के घर्षण को निम्नलिखित से कम किया जा सकता है- 

1. सतहों को तेल या ग्रीस लगाकर 

2. भारी वाहनों को चलाने के लिए पहियों का उपयोग करके, 

3. चलते पुर्जो में बाँल बियरिंग का उपयोग करके।



16. रेगिस्तान में मरीचिका बनने का क्या कारण है?

Ans: प्रायः गर्मियों के दोपहर में रेगिस्तान की यात्रा करने वाले यात्रियों को कुछ दूरी पर पानी होने का भ्रम हो जाता है। इस भ्रम को रेगिस्तान की मरीचिका या मृगतृष्णा कहते हैं। मरुस्थल की रेतीली भूमि गर्मी के कारण अधिक गर्म हो जाती है जिसके कारण धरती के पास हवा की गर्म परतें विरल हो जाती हैं किन्तु ऊपर की परतें ठंडी होने के कारण वे अपेक्षाकृत सघन होती हैं। ऐसी अवस्था में किसी वस्तु या पेड़ की चोटी से आने वाली प्रकाश की किरणें हवा की विभिन्न परतों से अपवर्तित होकर अभिलंब से दूर हटती जाती हैं परिणामतः एक ऐसी स्थिति आ जाती है जिसमें इन किरणों का पूर्ण आंतरिक परावर्तन हो जाता है। पेड़ की चोटी से आती हुई प्रकाश की किरणों का पूर्ण आंतरिक परावर्तन हो जाने के कारण यात्रियों को पेड़ का उलटा प्रतिबिंब दिखाई देने लगता है जिससे उन्हें भ्रम हो जाता है कि आगे पानी है जिसमें पेड़ की प्रतिबिंब दिखाई दे रही है।



17. धूमकेतु का आकार और उसकी संरचना कैसी होती है?

Ans: धूमकेतु सौरमण्डलीय निकाय है जो पत्थर, धूल, बर्फ और गैस के बने हुए छोटे-छोटे खण्ड होते है। यह ग्रहो के समान सूर्य की परिक्रमा करते है। धूमकेतु पतले तोरपिड़ो के आकार का होता है। 


धूमकेतू के तीन मुख्य भाग होते है -

1. नाभि: नाभि धूमकेतु का केन्द्र होता है जो पत्थर और बर्फ का बना होता है। 

2. कोमा: नाभि के चारों ओर गैस और घूल के बादल को कोमा कहते है।

3. पूछ: नाभि तथा कोमा से निकलने वाली गैस और धूल एक पूंछ का आकार ले लेती है।


धूमकेतु का सिर घनीकृत अनिलो, वैश्विक धूल और बर्फ से बना होता है।यह एक गंदे बर्फ के गोले जैसा दिखाई देता है। जब कोई धूमकेतु सूर्य के निकट आ जाता है है तो इसकी बर्फ पिघलने लगती है और सूर्य से आणि वाली वायु अनिल और धूल कणों को सूर्य से दूर उड़ा देती है यह एक प्रकाशमान पूछ की तरह दिखाई देती है।



18. बहुमूर्तिदर्शी(Kaleidoscope) क्या है?

Ans: समान आकार के दर्पणों को विभिन्न कोणों पर व्यवस्थित करने से इस युक्ति को प्राप्त किया जा सकता है। परन्तु दर्पणों के चमकीले मुखड़े एक दूसरे के सम्मुख होने चाहिए। दर्पण के इसी गुणधर्म का उपयोग बहुमूर्तिदर्शी बनाने में किया जाता है। 


19. भूकंप की तरंगे कितने प्रकार की होती है? 

Ans: भूकंप से उत्पन्न तरंग जो भूकंप मूल से उत्पन्न होकर प्रसारित होती है। यह तरंग सर्वप्रथम अधिकेंद्र (epicentre) पर पहुँचती है जहाँ से विभिन्न दिशाओं में प्रसारित होने लगती है। अधिकेंद्र से विभिन्न प्रकार की तरंगे अलग हो जाती हैं और पृथक-पृथक मार्ग एवं गति से अग्रसर होती हैं। 


भूकंप की तरंगे तीन प्रकार की होती है-

1. प्राथमिक या प्रधान तरंगें (Primary Waves) जिनकी गति सर्वाधिक तीव्र होती है और जो सीधे मार्ग से चलती हैं। ये टोस भाग से होकर तीव्रगति से गुजरती हैं किंतु तरल भागों में इनकी गति क्षीण हो जाती है। 

2. अनुप्रस्थ तरंगें या गौण तरंगें (Transverse Waves or Secondary Waves) जो प्राथमिक तरंग के बाद प्रकट होती हैं और अपेक्षाकृत मंद गति से चलती हैं । ये लहरें तरल भागों में नहीं प्रवेश कर पाती हैं किंतु अधिक विनाशकारी होती हैं। 

3. धरातली तरंगें या दीर्घ तरंगें (Surface Waves or Long Waves) जो प्राथमिक तथा गौण तरंगों की अपेक्षा मंद गति से चलती हैं। ये लहरें पृथ्वी की सतह पर चलती हैं और पृथ्वी का पूर्ण चक्कर लगाकर अधिकेंद्र पर पहुंचती हैं जिसके कारण इनका पथ सर्वाधिक लम्बा होता है और अधिकेंद्र पर सबसे बाद में पहुँचती हैं। ये लहरें जल (तरल) से भी गुजर जाती हैं और सर्वाधिक विनाशकारी होती हैं। पर्यवेक्षणों के आधार पर इन तीन प्रधान लहरों के अतिरिक्त कुछ अन्य लहर युग्मों (Pairs or Wave) का भी पता लगाया गया है जिनकी गति तथा प्रकृति में अंतर पाया जाता है। 


यह तरंगे भूकंप द्वारा उत्पन्न होती है। वे तरंगे जो पृष्ठ की सतह के साथ या उसके समीप संचरण करती है पृष्ठीय तरंगे और जो पृथ्वी के अंदर गति करती है पिंड तरंगे कहलाती है।



20. लेंस से आग कैसे लग जाती है?

Ans: धूप में एक उत्तल लेंस हाथ में पकड़ ले। जमीन पर उस लेंस की फोकस दूरी पर एक माचिस की तीली या पतला सूखा कागज रख ले। थोड़े समय के बाद वह माचिस की तीली या कागज आग पकड़ लेता है। क्योंकि जब सूर्य की समानान्तर किरने, उस लेंस के फोकस पर केंद्राभिमुख हो जाती है तो यही उस माचिस की तीली या कागज के टुकड़े को जलाने के लिए पर्याप्त गर्मी उत्पन्न कर देती है।



21. क्या बल को जोड़ा या घटाया जा सकता है?

Ans: जब बल एक ही दिशा में कार्य करता है तो उसमे बल जोड़े जाते है। किसी भी पदार्थ पर कार्य कर रहे परिणामी बल संयुक्त बल होते है। (अर्थात एक ही दिशा में कार्य कर रहे बलों का योग होता है)

जब दो बल विरुद्ध दिशा में कार्य कर रहे होते है तो, उस पदार्थ पर कार्य कर रहे बल उन दोनों बलों के बीच का अंतर होते हैं। 



22. ट्रांसफार्मर क्या है?

Ans: ट्रान्सफार्मर या परिणामित्र एक वैद्युत मशीन है जिसमें कोई चलने या घूमने वाला अवयव नहीं होता। यह एक ऐसा यंत्र है जो विद्युत आपूर्ति के वोल्टेज का परिवर्तन, प्राथमिक एवं उच्च द्वितीयक घुमाव में विभिन्न संख्याओं के लपेट होने से कर सकता है। उच्च वोल्टेज अधिक कार्यक्षम होते है। बिजली के तार द्वारा लम्बी दूरियों तक विद्युत प्रसारण के लिए यह वोल्टेज को बढाते है प्रसारण के लिए और उस ओर पर घटा देते है जो घरों कार्यालयों आदि को विद्युत आपूर्ति करते है। यह विद्युत चुम्बकीय सिद्धांत पर कार्य करता है।


ट्रान्सफार्मर का मुख्य उपयोग विद्युत शक्ति को अधिक वोल्टता या कम वोल्टता में बदलना है (जहाँ, जैसी आवश्यकता हो)। ऐसा करने से विद्युत उर्जा के उपयोग में सुविधा और दक्षता आती है। ध्यातव्य है कि आदर्श ट्रान्सफार्मर उर्जा या शक्ति उत्पन्न नहीं करता, न ही शक्ति का परिवर्तन (एम्प्लिफिकेशन) करता है, न ही आवृत्ति बदलता है।


ट्रान्सफार्मर के मुख्यतः दो भाग होते हैं:

1. कोर - जो किसी चुम्बकीय पदार्थ की बनायी जाती है। (किन्तु विशेष परिस्थितियों में वायु-क्रोडी ट्रान्सफार्मर भी बनाये जाते हैं)

2. वाइंडिंग - जो ताँबा, अलमुनियम या किसी अन्य सुचालक के तारों अथवा बस-बार से बनायी जाती है।


23. सूर्य, तारे तथा आकाश की ओर उड़ते हुए विमान अपनी वास्तविक स्थिति से ऊँचे क्यों दिखाई देते हैं ?

Ans: वायु का घनत्व पृथ्वी से ऊपर जाने पर कम हो जाता है। इसलिए वायुमण्डल को बहुत-सी परतों से मिलकर बना हुआ माना जाता है और यह बिलकुल सत्य भी है। इन स्तरों का अपवर्तनांक पृथ्वी तल से ऊपर जाने पर कम हो जाता है। जब सूर्य, तारे अथवा विमान से प्रकाश पृथ्वी की ओर आता है तो वह विरल माध्यम (Rare medium) से सघन माध्यम (Dense medium) में प्रवेश करता है और प्रत्येक परत पर अपवर्तित होकर अभिलम्ब की ओर झुकता है, जिससे तारे, सूर्य तथा विमान अपनी वास्तविक स्थिति (Orginal position) से ऊपर उठे हुए मालूम पड़ते हैं।



24. रोमन संख्या 7 को लिखते समय ज्यादातर बीच से काट क्यों दिया जाता है? हिन्दी के अंकों में नहीं काटा जाता ?

Ans: यूरोप और खासतौर से फ्रांस में 7 की संख्या के बीच में एक छोटी सी क्षैतिज रेखा खींच दी जाती है। इसका कारण 7 को 1 से अलग दिखाना है। फ्रांस में 1 की संख्या सिखाते समय बच्चों को शीर्ष से एक छोटी सी रेखा जो 45 अंश का कोण बनाती हुई नीचे की ओर खींचना सिखाते हैं। इसके साथ ही 7 की संख्या के मध्य में काटती हुई रेखा खींचते हैं ताकि दोनों भिन्न लगें। 1 के शिखर पर छोटी सी रेखा उसे सात जैसा बना देती है। फ्रांस के अलावा जर्मनी, रोमानिया, पोलैंड और रूस के स्कूलों में बच्चों को हाथ से गिनती लिखने का अभ्यास कराते समय यह रेखा खींचने का अभ्यास भी कराया जाता है।



25. मनुष्य को हिचकियाँ क्यों आती है और पानी पीने पर बंद क्यों हो जाती है ?

Ans: हिचकी का कारण होता है अचानक डायफ्राम में ऐंठन आना। फेफड़ों में अचानक हवा भरने से  कंठच्छद(एपिग्लॉटिस) बंद हो जाता है। इससे हिच या हिक् की आवाज आती है। इसीलिए इसें अंग्रेजी में हिक-अप कहते हैं। हिचकी जब आती है तब कई बार आती है। हिचकी एक शारीरिक दोष के कारण भी आती है। उसे सिंग्युलटस कहते हैं। हिचकी आने की कई वजहें हैं। जल्दी-जल्दी खाना, बहुत गर्म या तीखा खाना, हँसना, खाँसना भी हिचकी का कारण बनता है। शराब पीने और धूम्रपान से भी आती है। इलेक्ट्रोलाइट इम्बैलेंस भी हिचकियाँ पैदा करता है। श्वसन पर रिसर्च करने वाले एक ग्रुप का कहना है कि मानव शरीर के विकास का एक लक्षण हिचकी है। पानी के अंदर रहने वाला मेढक पानी और हवा को उसी तरह घुटकता है जैसे हम हिचकी लेते हैं। अक्सर समय से पहले जन्मे शिशु जन्म लेते ही कुछ समय तक हिचकियाँ लेते हैं। हिचकियाँ काफी छोटे समय तक रहतीं हैं। पानी पीने शरीर की सामान्य क्रिया जल्द वापस आ जाती है।


26. बादल क्यों और कैसे फटता है?

Ans: बादल फटना, बारिश का एक चरम रूप है। इस घटना में बारिश के साथ कभी-कभी गरज के साथ ओले भी पड़ते हैं। सामान्यत: बादल फटने के कारण सिर्फ कुछ मिनट तक मूसलधार बारिश होती है लेकिन इस दौरान इतना पानी बरसता है कि क्षेत्र में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। बादल फटने की घटना अमूमन पृथ्वी से 15 किलोमीटर की ऊंचाई पर घटती है। इसके कारण होने वाली वर्षा लगभग 100 मिलीमीटर प्रति घंटा की दर से होती है। कुछ ही मिनट में 2 सेंटी मीटर से अधिक वर्षा हो जाती है, जिस कारण भारी तबाही होती है।


मौसम विज्ञान के अनुसार जब बादल भारी मात्रा में पानी लेकर आसमान में चलते हैं और उनकी राह में कोई बाधा आ जाती है, तब वे अचानक फट पड़ते हैं, यानी संघनन बहुत तेजी से होता है। इस स्थिति में एक सीमित इलाके में कई लाख लीटर पानी एक साथ पृथ्वी पर गिरता है, जिसके कारण उस क्षेत्र में तेज बहाव वाली बाढ़ आ जाती है। भारत के संदर्भ में देखें तो हर साल मॉनसून के समय नमी को लिए हुए बादल उत्तर की ओर बढ़ते हैं। हिमालय पर्वत एक बड़े अवरोधक के रूप में इसके सामने पड़ता है। इसके कारण बादल फटता है।


पहाड़ ही नहीं कभी गर्म हवा का झोंका ऐसे बादल से टकराता है तब भी उसके फटने की आशंका बढ़ जाती है। उदाहरण के तौर पर 26 जुलाई 2005 को मुंबई में बादल फटे थे, तब वहां बादल किसी ठोस वस्तु से नहीं बल्कि गर्म हवा से टकराए थे।


27. मैक क्या है?

Ans: हवा में ध्वनि की गति 330 m/s होती है। जब कोई हवाई-जहाज हवा में ध्वनि की गति से अधिक तेज उड़ता है तो वह ध्वनि की आड़ को तोड़ देता है। वह विमान अपने सामने की वाट स्तम्भ को कुचल देता है। जिससे हम बिजली की कडक जैसी ध्वनि को सुनते है। इसी पराध्वनिक ध्वनि की इकाई को मैक कहा जाता है।

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