1. मछली को जल से बाहर निकालने पर वह क्यों मर जाती है?
Ans: मछली जलीय प्राणी है यह गिल्स द्वारा श्वसन क्रिया करती है। गिल्स जल में घुली आक्सीजन को अवशोषित करके कार्बन डाई ऑक्साइड गैस बाहर निकालते है। मछली के थोड़ी देर के लिए जल से बाहर निकाल देने पर श्वसन क्रिया बंद हो जाती है अतः वह मर जाती है।
2. खटाई डालने पर दूध क्यों फट जाता है?
Ans: दूध में जल, वसा, कार्बोहाइड्रेट तथा अकार्बनिक लवण होते हैं। केसीन नामक फास्फो प्रोटीन भी उपस्थित होता है। जब कोई अम्ल या खटाई दूध में मिलाई जाती है तो यह वसा तथा केसीन आपस में मिलकर थक्का बना लेते है तथा पात्र की तली में बैठ जाते है। जल, कार्बोहाइड्रेड व लवण ऊपर तैरते रहते हैं इस क्रिया को हम दूध का फटना कहते हैं।
3. पक्षी हवा में क्यों उड़ पाते हैं?
Ans: पक्षियों में पंख होते हैं जो अग्रपाद के रूपांतरण होते हैं। इनकी हड्डियाँ खोखली तथा फेफड़ों में वायुकोष होते है जो शरीर को हल्का बनाते हैं। इस प्रकार शरीर के हल्केपन तथा पंखों की सहायता से पक्षी हवा में सरलता से उड़ पाते हैं।
4. कई महिलाओं में पुरुषों की तरह ढाढ़ी आने लगती है। इसका क्या कारण है?
Ans: कई महिलाओं में पुरुषों की तरह दाढ़ी आने का मुख्य कारण पुरुष जनन हार्मोन एस्ट्रोजन की अधिकता है जिसके कारण अंडजनन की क्रिया बाधित होने लगती है। इस कारण उनमे पुरुषों के समान लक्षण दिखाई देने लगते हैं|
5. कैसे भर जाते हैं जख्म?
Ans: जैसे ही त्वचा पर कोई कट लगता है, कटी हुई रक्त वाहिनी से रक्त बाहर आने लगता है तथा रक्त में मौजूद फिबरिन नामक प्रोटीन लम्बे तन्तु बनाने लगती है। जो आपस में मिलकर थक्का बुन लेते है। थक्का घाव को ढककर रक्त प्रवाह को बंद कर देता है। रक्त का थक्का बनने के साथ-साथ श्वेत रुधिर कणिकाएं भी घाव में आ जाती है तथा अन्दर प्रवेश करने वाले जीवाणु पर आक्रमण कर उन्हें नष्ट कर देती है। थक्के के नीचे कट के किनारों पर कोशिकायें शीघ्रता से विभाजित होने लगती है तथा कटके ऊपर आवरण बनाने लगती है। चार पाँच दिन में यह आवरण मोटा होकर त्वचा की नई परत बना देता है तथा घाव भरने की क्रिया पूरा होने के बाद एक शुष्क पपड़ी उतर जाती है।
6. त्वचा द्वारा हमें स्पर्श का ज्ञान कैसे होता है?
Ans: त्वचा में संवेदी कोशिकायें होती है, जो तंत्रिकाओं से जुडी होती है। विभिन्न प्रकार के उद्दीपनों को ग्रहण करने के लिये विभिन्न प्रकार की संवेदी कोशिकायें होती है। स्पर्श की संवेदी कोशिकाओं द्वारा ग्रहण की गई सूचना तंत्रिकाओं द्वारा मस्तिष्क को पहुँचाती है तथा हमें स्पर्श का ज्ञान होता है।
7. चोरों का पता लगाने में अंगुलियों के निशान के साथ-साथ पैरों के निशान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन निशानों को सबूत के लिये कैसे सुरक्षित रखा जाता है?
Ans: जहाँ पर चोर के पैरों के निशान नज़र आता है उसके चारों ओर कार्ड बोर्ड की एक पतली लम्बी पट्टी काटकर जमीन में धंसाते है तथा प्लास्टर ऑफ़ पेरिस को पानी के साथ मिलाकर क्रीम जैसा गाढ़ा घोल तैयार करके घोल को गत्ते के घेरे में पलट देते है। प्लास्टर ऑफ़ पेरिस के सूखने (8-10 घंटे) तक गत्ते को हटाकर इसे जमीन से अलग कर इसके नीचे की ओर चिपकी मिट्टी को अलग कर लेते है और इसके ऊपर चिकना पदार्थ जैसे ग्रीस, सरसों का तेल आदि मलते हैं।
8. टीके क्यों लगाये जाते हैं?
Ans: ये टीके विभिन्न प्रकार के रोगों के बचाव के लिये लगाये जाते हैं। इन टीकों को लगाने से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न हो जाती है अर्थात रोगाणुओं से लड़ने की क्षमता उत्पन्न होने से रोगाणु शरीर पर अपना प्रभाव नहीं डाल सकते है।
9. अत्यधिक गर्मियों में पौधे क्यों मुरझा जाते हैं?
Ans: पौधे अपनी जड़ों द्वारा जमीन से जल का अवशोषण करते हैं| पत्तियों से वाष्पोत्सर्जन द्वारा यह पानी बाहर निकलता रहता है| अत्यधिक गर्मी में जब भूमि में मूल द्वारा जल अवशोषण से यदि वाष्पोत्सर्जन का अनुपात अधिक हो जाये तो पौधे में जल की मात्रा कम हो जाती है| इस कारण पौधे मुरझा जाते हैं।
10. नींबू, संतरा, टमाटर, इमली आदि स्वाद में खट्टे क्यों होते हैं?
Ans: नींबू, संतरा, टमाटर, इमली की कोशिकाओं की रिक्तिकाओं में धुलित अवस्था में साइट्रिक अम्ल, टार्टरिक अम्ल व ऑक्सेलिक अम्ल का संग्रह होता है। अतः इनमें स्थित इन रासायनिक पदार्थो के कारण ही नींबू, संतरा, टमाटर, इमली का स्वाद खट्टा होता है।
11. समुद्र का पानी स्वाद में खारा क्यों लगता है?
Ans: समुद्र में नदियों का पानी आता है, जिसमे बहुत से लवण मिले होते हैं| गर्मी के कारण समुद्र का जल वाष्प में बदलता रहता है, परन्तु लवण समुद्र में ही रह जाते है| इस कारण समुद्र के पानी में सोडियम क्लोराइड अधिक मात्रा में घुला रहता है। इसी लवण की उपस्थिति के कारण समुद्र का पानी खारा लगता है।
12. बालक को जब कान पर जोर से थप्पड़ मारा जाता है तो वह असंतुलित होकर नीचे क्यों गिर जाता है?
Ans: बालक के जब कान पर जोर से थप्पड़ मारा जाता है तो वह असंतुलित होकर नीचे गिर जाता है क्योंकि कान के अन्तःकर्ण में अर्द्धवर्ताकार नलिकाएँ होती हैं जो शरीर के सन्तुलन को बनाये रखती है। जब बालक को थप्पड़ मारा जाता है तो अर्धवृताकार नलिकाओं में भरा द्रव हिल जाता है तथा बालक असंतुलित होकर गिर जाता है।
13. ऊँचाई पर ऑक्सीजन की कमी होती है फिर भी पहाड़ों पर रहने वाले व्यक्ति बड़ी सक्रियता से अपने जीवन की गतिविधियाँ कैसे कर लेते हैं?
Ans: अधिक ऊँचाई पर ऑक्सीजन की कमी होती है फिर भी ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों के निवासी बड़ी सक्रियता से जीवन की गतिविधियाँ कर लेते हैं क्योंकि ऐसे क्षेत्र के निवासी अधिक ऊँचाई के प्रति अनुकूलित हो जाते है।इनकी वक्षगुहा का आयतन अधिक होता है जिससे इनके फेफड़ों के वायुकोषों का सतही क्षेत्र अधिक हो जाता है।इनके रुधिर में लाल रुधिर कणिकाओं की संख्या अधिक होती है तथा ऊतकों के मध्य अपेक्षाकृत अधिक सघन कोशिका जाल होता है। परिश्रम करने से उनकी पेशियों में कम केशिका किण्वन होता है और नाइट्रिक एसिड की मात्रा कम बनती है अतः इन्हें श्रम से होने वाली थकान को दूर करने के लिये कम ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है।
14. दौड़ते समय श्वास तेजी से क्यों चलती है?
Ans: दौड़ते समय अधिक परिश्रम के कारण ऊर्जा प्राप्ति हेतु अधिक ऑक्सीजन चाहिए होता है इसलिए श्वसन क्रिया तेज हो जाती है।
15. क्या कारण है कि ग्रेफाइट मुलायम होता है , जबकि हीरा कठोर होता है?
Ans: ग्रेफाइट की परतदार संरचना होती है। प्रत्येक कार्बन परमाणु अन्य तीन कार्बन परमाणुओं से जुड़कर षट्कोणिय वलय संरचना बनाते है। ऐसी वलय संरचनायें आपस में मिलकर एक परत संरचना का निर्माण करती है। प्रत्येक कार्बन का चौथा इलेक्ट्रान मुक्त अवस्था में रहता है दो परतों के मध्य आकर्षण बल दुर्बल होने के कारण एक परत दूसरी परत पर आसानी से फिसल सकती है इसलिए ग्रेफाइट नर्म होता है। जब हीरे की संरचना में कार्बन परमाणुओं की त्रिविम चतुष्फलकीय व्यवस्था होती है। प्रत्येक कार्बन परमाणु अन्य चार कार्बन परमाणुओं से एक बंध से जुड़ा रहता है। इस त्रिविमीय संरचना के कारण ही हीरा कठोर होता है।
16. क्या कारण है कि तना हमेशा ऊपर की ओर तथा जड़े नीचे की ओर ही बढ़ती है?
Ans: बीज अंकुरित होने के बाद जड़े निकलती है तथा ऊपर की ओर तना निकलता है। जड़े हमेशा नीचे की ओर ही बढ़ती है क्योंकि एक विशेष बल के खिंचाव से जड़े हमेशा नीचे की ओर बढ़ती है जिसे धनात्मक भू-अभिवर्तन बल कहते है| उसी तरह से तना सदैव प्रकाश की ओर ही बढ़ेगा क्योंकि ऊपर की ओर एक विशेष बल के खिंचाव से जिस ऋणात्मक भू-अभिवर्तन कहते हैं के कारण ऊपर की ओर बढ़ता है।
17. जानवर अपने बच्चों की पहचान कैसे करते हैं?
Ans: कुछ जीव जन्म के समय अपने बच्चों को चाटकर उन पर रासायनिक टैग लगा देते है। कुछ जीव अभिभावकों को पुकार के प्रत्युत्तर में बच्चों द्वारा की जाने वाली ध्वनि पर निर्भर करते है। जबकि कुछ अभिभावक अपने बच्चों को देखकर ही पहचान लेते हैं।
18. सूक्ष्मजीव मिट्टी को उपजाऊ कैसे बनाते हैं?
Ans: जीवाणु मृत शरीर के अनेक भागों को भोजन के रूप में उपयोग कर उन्हें अकार्बनिक पदार्थो में बदल देते है। इसी प्रकार पत्तियों, गोबर, मलमूत्र आदि का अपघटन कर उन्हें ह्यूमस में बदल देते है। ह्यूमस मिट्टी को उपजाऊ बनाता है।
19. घरों में कमरों की छत के निकट रोशनदान क्यों लगाये जाते हैं?
Ans: घरों में कमरों की छत के निकट रोशनदान लगाये जाते हैं। कमरे में व्यक्तियों के श्वसन तथा अन्य कारणों से हवा गर्म होकर ऊपर उठती है और रोशनदान से निकल जाती है इसका स्थान लेने के लिये खिड़कियों से ताज़ी ठंडी हवा अन्दर आ जाती है। इसी कारण घरों में कमरों की छत के निकट रोशनदान लगाये जाते हैं।
20. जब जलती हुई मोमबत्ती को हवा के एक सीमित दायरे में बंद कर दिया जाता है तो यह क्यों बुझ जाती है?
Ans: जब जलती हुई मोमबत्ती को हवा के एक सीमित दायरे में बंद कर दिया जाता है तो उसको शुद्ध ताज़ी हवा नहीं मिल पाती है। सीमित दायरे में जितनी ऑक्सीजन होती है, तब तक वह जलती रहती है जैसे ही ऑक्सीजन समाप्त होती है, मोमबत्ती बुझ जाती है। क्योंकि जलने के लिए ऑक्सीजन आवश्यक होती है|
21. सिरका व खाने के सोडे के घोल के पास यदि जलती हुई माचिस की तिली ले जाते हैं तो वह क्यों बुझ जाती है?
Ans: सिरका व खाने के सोडे का यदि घोल बनाया जाये तो इन दोनों पदार्थो की रासायनिक अभिक्रिया के फलस्वरूप कार्बनडाई ऑक्साइड गैस बनती है जो बुलबुलों के रूप में बनती हुई दिखाई देती है। जब इस घोल के पास जलती हुई माचिस की तीली ले जाई जाती है तो यह बुझ जाती है क्योंकि कार्बनडाई ऑक्साइड गैस आग बुझाने में सहायक होती है।
22. तिलचट्टे के पार्श्व भाग में मोम का लेप कर देने से क्यों मर जाते हैं?
Ans: तिलचट्टे के पार्श्व भाग में श्वास रन्ध्र होते है। मोम का लेप करने पर ये श्वास रन्ध्र बंद हो जाते हैं। श्वास रन्ध्र बंद हो जाने से श्वसन क्रिया रुक जाती है तथा कीट मर जाते हैं।
23. शरीर के किसी भाग में कोई चीज छुये हमें उसका तुरंत पता बिना देखे कैसे चल जाता है?
Ans: हमारे पुरे शरीर में त्वचा के ठीक नीचे स्नायुओं का जाल बिछा है जिनमें से विभिन्न प्रकार के अनुभवों के लिये अलग-अलग स्नायु कार्यरत रहते है यही स्नायु अनुभव मस्तिष्क को भेजती है और हमें उसका एहसास तुरंत हो जाता है।
24. एक ही जगह गोल घुमने के बाद रुक जाने पर भी चक्कर क्यों आते हैं?
Ans: हमारे शरीर का संतुलन बनाये रखने के लिये अन्तःकर्ण के भीतरी हिस्से में तीन अर्धवृत्ताकार नलिकायें होती है जिनकी दीवारों पर सूक्ष्म रोम होते है| इन नलिकाओं में द्रव भरा होता है। सामान्य अवस्था में यह द्रव स्थिर रहता है किन्तु गोल-गोल घुमने पर यह द्रव भी गति करने लगता है तथा सूक्ष्म रोमों द्वारा यह आवेश तंत्रिका द्वारा मस्तिष्क तक पहुँच जाता है। जिससे रुकने के बाद भी कुछ समय तक गतिशील रहता है। इसलिए ऐसा लगता है जैसे चक्कर आ रहे हों।
25. कुत्ते अपराधियों को कैसे पहचान लेते हैं?
Ans: सभी कुत्तों में गंध व श्रवण की अत्यंत विकसित क्षमता होती है। इसी सूंघने की क्षमता का प्रयोग कुत्ते दुश्मन व दोस्त की पहचान के लिये करते हैं। प्रत्येक मनुष्य में आहार एवं उपापचय में कुछ अंतर के कारण एक विशिष्ट गंध होती है।कुत्ते इन व्यक्तिगत गंध संकेतों को पढ़ लेते है एवं विभिन्न व्यक्तियों की पहचान कर लेते है एवं काफी दूर तक गंध का पीछा कर सकते है। कड हाउंड, जर्मन शेफर्ड और बीगल जैसी नस्ले अपराधी का पीछा करने की क्षमताओं के लिये प्रसिद्ध है।
26. हम क्यों भूलते हैं?
Ans: भूलने के लिये एक विशेष एंजाइम जिम्मेदार है जो मस्तिष्क के कार्टेक्स के अगले हिस्से में पाया जाता है। पी. के. सी. नामक यह एन्जाइम तनाव के वक़्त स्मरण शक्ति को बाधित कर देता है। परीक्षा के साथ, मंच पर भाषण देने जाते समय यह अधिक मात्रा में स्त्रावित होता है।
27. चिन्ता उम्र क्यों घटाती है?
Ans: चिन्ता या तनाव से शरीर की ऊर्जा कम होती है इसके अलावा व्यक्ति की प्रतिरोधक कोशिकायें एक विशेष प्रकार के रसायन के प्रभाव से जल्दी विघटित होने लगती है जिससे वे उम्र से जुड़ी बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाती है अतः चिन्ता उम्र घटती है।
28. जीव की कतरन(क्लोनिंग) से नया जीव कैसे उत्पन्न करते हैं?
Ans: डा. विलमट ने वस्क गर्भवती भेड़ के थनों से कुछ कोशिकायें पृथक कर प्रयोगशाला में पेट्रीडिश में पोषक तत्वों के सहारे विकसित करना प्रारम्भ किया।एक मादा भेड़ से अनिषेचित अंडाणु निकालकर केंद्र पृथक कर उसमें पेट्रीडिश में विकसित हो रही कोशिका का केन्द्रक संलयित किया गया। संलयित कोशिका में जैव रासायनिक क्रियायें प्रारम्भ हो गयी तथा पेट्रीडिश में भ्रूण का निर्माण हो गया।इस तरह इस भ्रूण को तीसरी भेड़ के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया गया। गर्भाविधि पूर्ण होने पर इस भेड़ से जन्मा बच्चा उस भेड़ का हुबहू था।जिस भेड़ के थनों की कोशिका को पेट्रीडिश में विकसित किया गया था। इस विधि से जन्मी भेड़ को डॉली नाम दिया गया है।
29. छुईमुई (मिमोसा पुडिका) का पौधा छूने पर क्यों मुरझा जाता है?
Ans: छूईमुई की पत्तियाँ कई कोशिकाओं की बनी होती है तथा इनमें द्रव पदार्थ भरा रहता है। इस द्रव के दाब से कोशिका की भित्ती दृढ़ रहती है तथा पर्णवृन्त को खड़ा रखने में सहायक होता है। जब इन कोशिकाओं द्रव का दाब कम ही जाता है तो पर्णवृन्त तथा पत्तियों की कोशिका को दृढ़ नहीं रख पाता है जैसे ही कोई व्यक्ति इसकी पत्तियों को छूता है एक संवेदी संदेश पर्णकों तथा पत्तियों के आधार तक पहुँचता है।जिसके परिणाम स्वरूप पत्तियों के निचले भाग की कोशिकाओं में द्रव का दाब गिर जाता है जबकि ऊपरी भाग की कोशिका के दाब में कोई परिवर्तन नहीं होता है, अतः पत्तियाँ मुरझा जाती है।
30. नाख़ून एवं बाल काटने पर दर्द क्यों नहीं होता है?
Ans: शरीर के किसी भी अंग/भाग में दर्द की अनुभूति तब होती है जब उसमें स्नायु एवं रक्त संचार होता रहे। नाख़ून एवं बाल शरीर के ऐसे अंग है जिनमें न ही स्नायु होते है और न ही इनमें रक्त संचार होता है अतः जब इनको काटा जाता है तो हमें दर्द की अनुभूति नहीं होती है।
31. खानों में दूषित गैस की सुचना देने वाले यंत्र द्रव्य के किस गुण पर आधारित है?
Ans: खानों में दूषित गैस की सूचना देने वाला यंत्र द्रव्य के विसरण के गुण पर आधारित है। गैसों में कणों की एक दूसरे में समांग होने की इस प्रवृति को विसरण कहते हैं तथा इस विसरण के गुण के कारण ही खानों में फैलने वाली गैस का पता चलता है।
32. पुरावत्ववेत्ता और इतिहासकार पृथ्वी की खुदाई के फलस्वरूप प्राप्त प्राचीन कंकाल, हड्डियों के अवशेषों की आयु कैसे ज्ञात कर लेते हैं?
Ans: पुरातत्ववेत्ता और इतिहासकार पृथ्वी की खुदाई के फलस्वरूप प्राप्त प्राचीन कंकालों के अवशेषों की आयु कार्बन काल निर्धारण(कार्बन डेटिंग) द्वारा ज्ञात कर लेते हैं। कार्बन काल निर्धारण में प्राणी व वनस्पति में कार्बन का जीवित अवस्था में जितना विघटन होता है उतना ही वायुमंडल से ग्रहण भी करता है अर्थात प्राणियों तथा वनस्पतियों में जीवित अवस्था में कार्बन-14 का अनुपात स्थिर रहता है, परन्तु जब प्राणी मर जाता है तब उसमें विद्यमान रेडियो कार्बन-14 का विघटन तो निरंतर होता रहता है। परन्तु वायु मंडल से ग्रहण नहीं करता है। इस तरह कार्बन-14 की मात्रा का पता लगाकर आयु निर्धारण किया जाता है।
33. ग्वारपाठे के पौधे को घर में बने जलकुंड में लगा देने पर वह गलकर नष्ट क्यों हो जाते हैं?
Ans: ग्वारपाठे के पौधे को घर में बने जलकुंड में रोपित कर दिया जाये तो वह गलकर नष्ट हो जाता है क्योंकि ग्वारपाठा शुष्क आवास का पौधा है उसमें जलीय आवास के अनुसार अनुकूलन नहीं होते हैं| अतः वह गलकर नष्ट हो जाता है।
34. मृत्यु के बाद मनुष्य का शरीर क्यों अकड़ जाता है?
Ans: मनुष्य का शरीर अनेक मांसपेशियों का बना होता है। ये मांसपेशियां अनेक लम्बे-लम्बे पेशी तन्तुओं से बनी होती है। जीवित स्थिति में ये मांसपेशियां लचीली होती है किन्तु मृत्यु के पश्चात् ये कठोर हो जाती है क्योंकि मृत्यु के बाद ये आपस में क्रासब्रिज के द्वारा आपस में जुड़ना प्रारम्भ कर देती है, जिससे तंतुओं का लचीलापन कम हो जाता है तथा मांसपेशियां अकड़ने लगती है। साथ ही मृत पेशियों में कैल्शियम की मात्रा भी कम हो जाती है जिससे भी मांसपेशियां कड़ी हो जाती है।
35. सर्दियों के दिनों में हमारे मुँह से भाप क्यों निकलती है?
Ans: सर्दियों के दिनों में बच्चे अक्सर मुँह से भाप निकालने का खेल खेलते हैं। सर्दियों में हमारे वातावरण का तापमान शरीर की तुलना में बहुत कम होता है जब बाहरी वातावरण का तापमान औसत बिंदु से भी कम होता है अर्थात नमी अधिक मात्रा में होती है तब हम मुँह से या नाक से हवा बाहर निकालते है तो शरीर से निकलने वाली हवा का तापमान अधिक होता है तथा बाहरी वातावरण का तापमान कम होने से यह संघनित होने लगती है तथा भाप के रूप में दिखाई देती है।
36. गर्मियों के दिनों में नाक से अक्सर खून क्यों बहता है?
Ans: नाक के अन्दर की सतह पर दोनों नाक छिद्रों के बीच की दीवार एक पतली और नम श्लेष्मा (म्यूकस मेम्ब्रेन) से ढ़की रहती है। इस सतह में रक्त ले जाने के लिये कई पतली-पतली रक्त शिरायें होती है। गर्मी के दिनों में वातावरण जब बहुत शुष्क होता है तो इस झिल्ली के सूखने के कारण जोर से छींकने या हल्के झटके लगने पर शिरायें टूट जाती है और नाक से खून बहने लगता है।
37. भय से चेहरा पीला क्यों पड़ जाता है?
Ans: जब हमारे सामने कोई खतरा या भय दिखाई देता है हमारा मस्तिष्क कुछ ऐसे तंत्रिका आवेश भेजता है जो त्वचा की कोशिका को अस्थाई रूप से सिकुड़ने को कहते है। कोशिकाओं के संकुचित हो जाने से चेहरे की रक्त वाहिनियों में रक्त प्रवाह में बाधा उत्पन्न हो जाती है। अतः रक्त प्रवाह होने से चेहरा पीला पड़ने लगता है।
38. गरिष्ठ भोजन के सेवन के पश्चात नींद क्यों आने लगती है?
Ans: प्रतिभोज विवाह या बर्थडे पार्टी व अन्य समारोह पर हम गरिष्ठ भोजन लेते है जिसमें वसा, चिकनाई व शर्करा की मात्रा अधिक होती है। इसके सेवन के पश्चात हमें नींद आने लगती है क्योंकि नींद के लिये हमारे मस्तिष्क का हाइपोथेलैमस उत्तरदायी होता है जब यह हमारी पेशियों को आराम करने का आदेश देता है तो हम नींद या सुस्ती का आभास होने लगता है। जैसे-जैसे मांसपेशियां आराम की स्थिति में आती है और हमारी पलकें भारी होने लगती है।गरिष्ठ भोजन करने की स्थिति में हाइपोथेलैमस में मिलेटोनिन नामक प्रोटीन कम मात्रा में बनता है। साथ ही रक्त ट्यूब की सप्लाई आमाश्य व आँतों में अधिक करने लगते है जिसे की सप्लाई मस्तिष्क को पूरी नहीं हो पाती है तथा मस्तिष्क थकान का अनुभव करने लगता है और हमें नींद या सुस्ती आने लगती है।
39. अनेक जीव घोर अन्धेरे में भी साफ़-साफ़ कैसे देख लेते है?
Ans: यदि मनुष्य घोर अँधेरे में अपनी आँखों को खुला रखें तो उन्हें कुछ भी दिखाई नहीं देता है। किन्तु प्रकृति में कुछ ऐसे जीव है जिन्हें अँधेरे में भी साफ़ दिखाई देता है। बिल्ली या शार्क बहुत धुँधली रोशन में भी बहुत कुछ देख सकते है उनकी आँखों में एक विशेष रचना होती है तथा उनकी आँखों में रोड़ कोशिकाओं की संख्या भी अधिक होती है जो मध्यम प्रकाश के प्रति भी संवेदनशील होती है। उल्लू की आँख का प्यूफिल बहुत बड़ा होता है, जिससे उसकी आँखों में अधिक प्रकाश जा सकता है इसके अलावा ऐसे जीवों के रेटिना में एक झिल्ली भी होती है जो दर्पण की तरह प्रकाश को अन्दर की ओर परावर्तित कर सकती है और रात में भी ज्यादा से ज्यादा प्रकाश को समेट लेते है। चमगादड़ जैसे जीव अपने शिकार को देखकर नहीं बल्कि आवाज को पहचानकर या अनुमान के आधार पर शिकार को पकड़ते हैं।
40. फूलों में मन को प्रसन्न करने वाली भीनी- भीनी खुशबू कहाँ से आती है?
Ans: फूलों तथा सुगन्धित पत्तियों में अनेक जैव रासायनिक क्रियाओं के फलस्वरूप सुगन्धित कार्बनिक पदार्थ बनते है जो कि रासायनिक रूप से टर्पीन और बैन्जिन से व्युत्पन्न होते है ये तैलीय संघटन होते हुये भी वास्तविक तेल नहीं होते है और वायु के सम्पर्क में आते ही उड़ जाते है।
41. पाश्चरीकरण क्या होता है?
Ans: पाश्चरीकारण तरल खाद्य पदार्थो को जर्म रहित करके संरक्षित करने की एक तकनीक है। जिसमें तरल खाद्य पदार्थो आमतौर पर दूध को 60-65C पर 39 मिनिट तक गर्म करके फिर 5C या उससे कम तापमान पर ठंडा किया जाता है। गरम करने से सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते है तथा ठंडा करने पर किसी कारण से जीवित रह गये सूक्ष्म जीव की वृद्धि को रोकता है। पाश्चरीकृत दूध या खाद्य पदार्थ को वायु रुद्ध बर्तनों में संग्रहित करने पर वे लम्बे समय तक खराब नहीं होते है। इस विधि द्वारा फलों के रस शराब व बीयर को संरक्षित किया जाता है।
42. जीव-जंतु शीत ऋतु में अधिक खाना खाते हैं, क्यों?
Ans: शीत ऋतु में वातावरण का ताप कम हो जाता है किन्तु जीव-जन्तुओं के शरीर का ताप उतना ही रहता है। इस प्रकार तापान्तर अधिक हो जाने से शरीर से ऊष्मा क्षय होने की दर बढ़ जाती है। अतः शरीर का ताप नियत रखने के लिए वे अधिक खाना खाते हैं।
43. कपड़े पर मोम रगड़ने से वह वाटर प्रूफ क्यों बन जाता है?
Ans: कपड़े पर मोम रगड़ने पर कोशिकाएँ बंद हो जाती हैं। अतः वह वाटर प्रूफ बन जाती हैं।
44. क्या कारण है कि नीले लिटमस पत्र को निम्बू के रस में डुबाने पर वह लाल रंग का हो जाता है जबकि पानी व दूध में डुबाने पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है?
Ans: नीला लिटमस पत्र अम्ल के साथ क्रिया करके लाल रंग देता है। नींबू के रस में अम्लीय गुण होने के कारण वह लाल हो जाता है जबकि दूध व पानी उदासीन प्रकृति के होने के कारण लिटमस पर कोई प्रभाव नहीं डालते हैं।
45. छिपकली पानी पीते हुए क्यों नहीं दिखाई देती है?
Ans: छिपकली पानी पीते हुए दिखाई नहीं देती है क्योंकि इन्हें इनके भोजन से ही पर्याप्त पानी मिल जाता है और अलग से पानी पीने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
46. थर्मस फ्लास्क में रखी गर्म चीजें अधिक समय तक गर्म या ठंडी चीजें अधिक समय तक ठंडी रहती है। क्यों?
Ans: थर्मस फ्लास्क की बनावट इस प्रकार होती है कि इसमें अन्दर रखे द्रव से ऊष्मा का स्थानान्तरण चालन, संवहन और विकिरण तीनों ही विधियों से नहीं हो पाता है। इसलिए इसमें रखी वस्तुएँ अधिक समय तक गर्म या ठंडा रह सकता है।
47. वर्षा के मौसम में चमड़े के बने जूतों पर फफूँद क्यों लगती है?
Ans: वर्षा का मौसम फफूँद की वृद्धि के लिए अनुकूल वातावरण बनाता है। इसके बीजाणु जो वातावरण में फैले होते हैं जो सामान्यतः परजीवी या मृतोपजीवी होते हैं। चमड़े के बने जूते पर मौसमी नमी व प्राप्त पोषण के कारण अनुकूल परिस्थिति पाकर इनमें फफूँद उग आते हैं।
48. हम दूध को उपयोग करने से पहले उसे उबालते क्यों हैं?
Ans: हम दूध को उपयोग करने से पहले उबालते हैं क्योंकि इसमें सूक्ष्मजीव हो सकते हैं। ये किसी भी परिस्थिति में वृद्धि करते हैं। अतः हमारे शरीर में पहुँचकर हमें नुकसान पहुंचा सकते हैं। दूध को उबालने से ये सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं और दूध पीने योग्य हो जाता है।
49. भोजन बनाते समय सूती वस्त्रों का ही प्रयोग करना चाहिए।क्यों?
Ans: सूती वस्त्रों की तुलना में कृत्रिम रेशे; जैसे- नायलन , टेरेलीन आदि अधिक तेजी से जलते हैं तथा शरीर से चिपक जाते हैं। अतः जलने जैसी दुर्घटना से बचने के लिए भोजन बनाते समय सूती वस्त्रों का प्रयोग करना चाहिए।
50. किसान खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिये मटर कुल के पौधों की फसल क्यों उगाते हैं?
Ans: किसान खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिये मटर कुल के पौधों की फसल उगाते हैं क्योंकि मटर कुल के पौधों की जड़ो में एक सहजीवी जीवाणु जिसे राइजोबियम कहते हैं, पाया जाता है यह वातावरण की स्वतन्त्र नाइट्रोजन के नाइट्रेट यौगिक में बदल देते है। जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ जाती है।
51. सर्दी -जुकाम होने पर हमें गंध का ज्ञान स्पष्ट रूप से क्यों नहीं होता है?
Ans: गंध वाली वस्तु के सूक्ष्म कण वायु के साथ नाक में प्रवेश करते हैं तो घ्राण कोशिकायें इस गंध को ग्रहण करती है। गंध का उद्दीपन, तंत्रिकाओं द्बारा मस्तिष्क में पहुँचता है और हमें गंध का ज्ञान होता है परन्तु सर्दी-जुकाम होने पर श्लेष्मा झिल्ली में सूजन आ जाने के कारण घ्राण कोशिकायें गंध के उद्दीपन को ग्रहण नहीं कर पाती है। इसलिए हमें गंध का ज्ञान स्पष्ट रूप से नहीं हो पाता है।
52. गैसीय पदार्थो की गंध हवा में तीव्रता से क्यों फ़ैल जाती है?
Ans: गैसीय पदार्थो के अणुओं के आकर्षण बल बहुत कम होने से वे स्वतन्त्र रूप से गति कर सकते है। यही कारण है कि गैसीय पदार्थो की गंध हवा में तीव्रता से फ़ैल जाती है।
53. आम, टमाटर एवं गूदेदार फलों का स्वस्थ आकार कैसे बना रहता है?
Ans: कोशिका की पूर्ण स्फीति अवस्था, कोशिका के आकार को बनाये रखती है। सरस एवं गूदेदार फल जैसे आम, टमाटर का स्वस्थ आकार इनकी कोशिकाओं की पूर्व स्फीति के कारण ही होता है।
54. सुखी हुई किशमिश को आसूत जल में रखा जाये तो वह फूल जाती है। क्यों?
Ans: सुखी किशमिश को आसूत जल में रखा जाये तो वह फूल जाती है इसका कारण है कि किशमिश के अन्दर शर्करा का गाढ़ा घोल होता है तथा कि किशमिश का छिलका अर्धपारगम्य झिल्ली का कार्य करता है चूँकि किशमिश के कोशिका रस की सान्द्रता आसुत जल की अपेक्षा अधिक होती है इसलिए परासरण क्रिया द्वारा किशमिश में प्रवेश कर जाते है और वह फूल जाती है।
55. ठंडे पानी की बजाय गर्म पानी से कपड़े ज्यादा साफ होते हैं। क्यों?
Ans: पानी को गर्म करने पर उसका पृष्ठ-तनाव कम हो जाता है। अतः गर्म पानी ठंडे पानी की अपेक्षा अधिक क्षेत्रफल में फैलकर गन्दगी के कणों को हटा देता है।
56. कठोर जल में कपड़े धोते समय साबुन झाग क्यों नहीं देता है?
Ans: कठोर जल में केल्सियम व मैग्नीशियम के क्लोराइड, सल्फेट तथा बाई कार्बोनेट के लवण घुले रहते है अतः ये लवण साबुन के साथ क्रिया करके अविलय यौगिक बनाते है जो कि पात्र में पैंदे में जमा हो जाते है। इन्हीं अविलय यौगिक के बनने के कारण साबुन झाग नहीं देता है।
57. जादू के खेल दिखाने वाले अक्सर नींबू से आग उत्पन्न करके दिखाते है।ऐसा कैसे संभव है?
Ans: नींबू के मध्य भाग से काटकर सोडियम धातु का टुकड़ा रखा जाता है। सोडियम धातु नींबू के रस से क्रिया करती है एवं हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करती है। यह क्रिया ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है अतः इस क्रिया में उत्पन्न ऊष्मा से हाइड्रोजन गैस वायु में जलने लगती है जो हमें आग के रूप में दिखाई देती है।
58. मध्य प्रदेश के आदिवासी क्षेत्र में टेथाइरिज्म रोम (पक्षाघात) अधिक पाया जाता है, क्यों?
Ans: मध्य प्रदेश के निर्धन आदिवासी लोग खेसारी दाल का निरंतर प्रयोग करते हैं।इस दाल में एक प्रकार का तन्त्रिका विष पाया जाता है जो तन्त्रिका तन्त्र को प्रभावित करता है तथा पक्षाघात रोग हो जाता है।
59. एक व्यक्ति सफ़ेद मक्का का निरंतर प्रयोग करते रहने से अंधा क्यों हो जाता है?
Ans: सफ़ेद मक्का में केरोटिन वर्णक नहीं होता है यह वर्णक शरीर में विटामिन-ए में परिवर्तित हो जाता है। जो व्यक्ति निरंतर सफ़ेद मक्का का प्रयोग करते है और विटामिन-ए प्रदान करने वाले अन्य खाद्य नहीं ले पाते है उनके शरीर में विटामिन-ए की कमी हो जाती है।जिससे व्यक्ति अन्धे हो जाते हैं।
60. लाइसोसोम को आत्मघाती थैली क्यों कहा जाता है?
Ans: लाइसोसोम में जल अपघटनी एन्जाइम कोशिका में आकर पूरी कोशिका का ही पाचन कर देते है अतः लाइसोसोम को आत्मघाती थैली कहा जाता है।
61. वायरस को सजीव व निर्जीव के बीच की कड़ी क्यों कहा जाता है?
Ans: वायरस को सजीव व निर्जीव के बीच की कड़ी इसलिए कहा जाता है क्योंकि जब वायरस सजीव के शरीर में होता है तो उसमें स्वयं का उपापचयी तंत्र क्रिया करने लगता है तथा प्रजनन करने में सक्षम होता है किन्तु उपापचयी क्रिया करता नहीं है अतः इसे सजीव व निर्जीव के बीच की कड़ी कहा जाता है।
62. रक्त का रंग लाल क्यों होता है?
Ans: रक्त में लाल रक्त कणिकाएँ होती हैं जो आकार में छोटी व संख्या में अधिक होती हैं। इनका लाल रंग जटिल पदार्थ हिमोग्लोबिन के कारण होता है, इन्हीं लाल रक्त कणिकाओं के कारण रक्त का रंग लाल होता है।
63. खनिज लवण ऊर्जा उत्पन्न नहीं करते, फिर भी संतुलित आहार में महत्वपूर्ण पोषक तत्व क्यों है?
Ans: खनिज लवण ऊर्जा उत्पन्न नहीं करते फिर भी संतुलित आहार का महत्वपूर्ण पोषक तत्व है क्योंकि ये अस्थियों व दांतों का निर्माण करते है, एंजाइम संश्लेषण करते हैं, अम्ल व क्षार का संतुलन बनाये रखते है।शरीर के परासरण दाब को बनाये रखते हैं।
64. माइटोकोंड्रिया को कोशिका का शक्तिगगृह क्यों कहा जाता है?
Ans: माइटोकोंड्रिया में ही ग्लूकोस का ऑक्सीकरण होता है क्योंकि ऑक्सीकरण से सम्बंधित एंजाइम इसी कोशिकांग में होते है तथा ऑक्सीकरण के फलस्वरूप ऊर्जा ए. टी. पी. (A T P) के रूप में बाहर निकलती है अतः इसे कोशिका का शक्तिगृह कहते हैं।
65. रक्त एक महत्वपूर्ण ऊतक है कैसे?
Ans: रक्त में लाल रक्त कोशिकाएं होती है जो शरीर के सभी भागों में आक्सीजन ले जाती है, श्वेत रक्त कोशिकाएं होती है जो संदूषण से लडती है| और बिम्बाणु जो रक्त का थक्का बनाने में मदद करते है| किसी भी व्यक्ति की अधिक रक्त स्त्राव से मृत्यु हो सकती है अगर बिम्बाणु संख्या कम हो जाती है| इस रोग को होमोफिलिया कहते है|
66. आँखों की देख रेख कैसे की जाती है?
Ans: 1. सूर्य ग्रहण के दौरान सीधे सूर्य की तरफ ना देखे |
2. आँखों को ठंडे पानी से साफ़ करे |
3. वेल्डिंग या प्रयोग शाला में कार्य करते समय रक्षात्मक चश्मों का प्रयोग करे |
4. तेज रोशनी में शीतलन चश्मे पहने |
5. आँख में धूल के कण पद जाने पर आँखों को न मले |
67. त्वचा की विशेषताएं बताईये?
Ans: यह एक जल रोधी अंग है|वाष्पीकरण द्वारा अत्यधिक जल की क्षति को रोकती है| यह रोगाणुवीय आक्रमण के विरुद्ध परम रक्षा पंक्ति है| इसमें तंत्रिकाएं होते है जिससे संवेदनाओ का ज्ञान होता है| इसमें स्वेद व तेल ग्रंथिया पाई जाती है| यह एक दाब संवेदी अंग है|
68. हम ध्वनि को कैसे सुनते है?
Ans: जब ध्वनि हमारे कर्णपटह तक पहुचती है, तब वह आगे पीछे कम्पित होती है श्रवण तंत्रिकाएं इन कम्पन्नोको संकेतों के रूप में मस्तिष्क को ले जाती है| हम को ध्वनि सुनने के लिए मध्य कर्ण में स्थित कर्णपटह अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है|
69. तंत्रिका क्या है?
Ans: किसी जीव के शरीर में तंत्रिका ऐसे रेशे को कहते हैं जिसके द्वारा शरीर के एक स्थान से दूसरे स्थान तक संकेत भेजे जाते हैं। तंत्रिका को अंग्रेजी में नर्व कहते हैं। मनुष्य शरीर में तंत्रिकाएँ शरीर के लगभग हर भाग को मस्तिष्क या मेरूरज्जु से जोड़कर उनमें आपसी संपर्क रखतीं हैं। यदि तंत्रिकाओं को क़रीब से देखा जाए तो वह न्यूरॉन नामक कोशिकाओं (सैल) के गुच्छों की बनी होतीं हैं।
जब मस्तिष्क को किसी हाथ को हिलने का आदेश देना होता है तो मस्तिष्क से हाथ तक यह संकेत तंत्रिकाओं के ज़रिये ही भेजा जाता है। इसी तरह जब आँख पर कोई छवि पड़ती है तो उसके संकेत दिमाग़ तक तंत्रिकाएं ही ले जातीं हैं।
70. मानव कान के कौन-कौन से भाग है?
Ans: कान (Ear) अधिकांश जीव जंतुओं के शरीर का आवश्यक अंग हैं। इस लेख में मानव शरीर से संबंधित उल्लेख है। मनुष्य में एक जोड़ी कर्ण सिर के पार्श्वों में स्थित होते हैं। ये सुनने तथा शरीर का सन्तुलन बनाए रखने का कार्य करते हैं।
प्रत्येक कर्ण के तीन भाग होते हैं- बाह्य कर्ण, मध्य कर्ण और अन्तः कर्ण।
1. बाहरी कान
कीप या कर्णपाली से आवाज़ की तरंगें इकट्ठी करके कान के पर्दे तक पहुँचाती है। इससे कान के पर्दे में कम्पन होता है। बाहरी कान के गुफानुमा रास्ते की त्वचा आम त्वचा जैसे एक चिकना पदार्थ स्वात्रित करती है। यही पदार्थ इकट्ठा होकर कान की मोम बनाता है। मोम धूल और अन्य कणों को इकट्ठा करने में मदद करती है। हम में से ज़्यादातर लोगों को कान में से बार बार यह मोम निकालते रहने की आदत होती है। इस आदत से चोट लग सकती है। अक्सर मोम सख्त हो कर कान के पर्दे पर चिपक जाती है। इससे बाहरी कान में दर्द होता है।
2. मध्य कान
मध्य कान यूस्टेशियन ट्यूब द्वारा नाक की गुफा से जुड़ा रहता है। यूस्टेशियन नाक को ई एन टी (ईयर नोज़ थ्रोट) ट्यूब भी कह सकते हैं क्योंकि यह कान नाक और गले को जोड़ती है। इसके कारण मध्य कर्ण वातावारण में अचानक हुए हवा के दबाव में बदलाव को झेल सकती है। अगर अचानक किसी विस्फोट या धमाके की आवाज़ कान के पर्दे से टकराए तो वो फटता नहीं है क्योंकि यह जबर्दस्त दवाब ईएनटी ट्यूब द्वारा नाक की गुफा में चला जाता है। पर मुश्किल यह है कि यही ई एन टी ट्यूब नाक व गले के संक्रमण भी कान तक पहुँचा देती है।
3. अन्तः कर्ण
यह कान का अन्तिम भाग होता है। इसे कलागहन कहते हैं। यह एक सफ़ेद रंग के द्रव में तैरता रहता है जिस पैरीलिम्फ कहते हैं। कलागहन के अन्दर भरे द्रव को एण्डोलिम्फ कहते हैं।
71. मछली जब पानी के बाहर होती है तो मर क्यों जाती है?
Ans: मछली अपने गलगदो के द्वारा सांस लेती है ये गलफडे महीन झिल्लियो से बने हुए होते है इन गलफडो की झिल्लियो में संरचनात्मकशक्ति का अभाव होता है उन्हें गिरने से बचाने के लिए उन्हें जल से बल प्रदान किया जाता है वायु जल से भी कम तरणशील होता है अत:गलफड़े जब मछलीपानी के बाहर होती है तो एक ऊतक के ढेर हो जाते है और मछली तब घुटन के कारण मर जाती है|
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